रविवार, 9 मार्च 2014

महिला दिवस पर कुछ कविताये

१.महिला दिवस पर .....
उन्हें खुला आसमान चाहिए..
जहाँ वे उड़ सकें ,
उन्हें पंख मत दो
बस बेड़ियाँ खोल दो ।।

२.बेटियों के पापा 
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मर्दों की भीड़ में,
कुछ पिता,
बेटियों के पापा होते है|

अपनी नन्ही बेटियों को
काँधे टिकाये
बिता देते है, सारी रात,
बिटिया को सुलाते 
ख़ुद जागे -जागे|

दुनियां के बाकी पापाओ से
एकदम अलग,
ये बेटियों के पापा
तो बस, बेटियों के पापा होते है |

ये अपनी बेटियों को सिखाते है,
साहस और बहादुरी की बाते|
ये थमा देते है, अपनी बेटियों को साइकिल
थाम लेते है, उसका कैरियर, मजबूती से
और कहते है बेटियों को, बहादुर बनो
मारो पैडल|
आभार