गुरुवार, 3 नवंबर 2016

हिन्दू धार्मिक प्रसंग की गलत ब्याख्या

इस्लाम को मानाने वाले अपनी कमियों को छुपाने के लिये अक्सर हिदू धर्म के सन्दर्भ दिया करते है,
कहा जाता है की हिन्दुओ में भी एकेस्वरवाद का वर्णन है, तो बता दू हिन्दू चिंतन में सर्वेस्वर्वाद की चर्चा ज्यादा है, सर्वेश्वरवाद, ईश्वर और जगत् में अभिन्नता मानता है। उसके सिद्धांतवाक्य हैं- 'सब ईश्वर हैं' तथा 'ईश्वर सब हैं'। एकेश्वरवाद केवल एक ईश्वर की सत्ता मानता है। सर्वेश्वरवाद ईश्वर और जगत् दोनों की सत्ता को मानता है,
मुसलमानों द्वारा कहा जाता है की ब्रम्हां जी ने अपनी पुत्री सरस्वती से बिवाह कर लिया था, सर्वप्रथम तो देवी सरस्वती की कोई माँ नहीं थी ब्रह्मा ने ही उनका निर्माण किया इसलिय ब्रम्हा ही उनके माता और पिता कहलाये ब्रह्मा को अपनी ही रचना इतनी भाई की वे उस पर आसक्त हो गए, यह कोई अनहोनी न थी, फिर भी ब्रह्मः के इस कृत्य को अनैतिक माना गया और उन्हें सजा स्वरुप अपूज्य घोषित कर दिया गया, ब्रह्मा और सरस्वती से जो जन्मे वे मनु थे और मानव सभ्यता के प्रथम वाहक, ब्रह्मा द्वारा प्रकट होने के कारण मनु स्वयंभू कहलाये। आगे चल कर कई मनु हुए,

मुसलमानों द्वारा कहा जाता है की श्री कृष्ण की 16000 पत्नियाँ थी, लेकिन जो सत्य है की श्री कृष्ण कि केवल एक ही पत्नी थी रुक्मणि, 16000 पत्नियों की कहानी है की कृषण ने जब नरकासुर का बध किया तो उसके कैद में 16000 औरते थी, जो आजाद होने पर खुश तो थी पर उनकी चिंता थी की उनका भरण पोषण अब कौन करेगा, उन्हें कौन अपनाएगा और सहारा देगा तब कृष्ण ने उन्हें अपनाया और उनका जीवन सुरक्षित किया उन्हें सम्मान दिया,