गुरुवार, 15 अगस्त 2013

अदम गौंडवी की रचना

उतरा है रामराज विधायक निवास में। 

पक्के समाजवादी हैं, तस्कर हों या डकैत
इतना असर है ख़ादी के उजले लिबास में। 

आजादी का वो जश्न मनाएं तो किस तरह
जो आ गए फुटपाथ पर घर की तलाश में। 

पैसे से आप चाहें तो सरकार गिरा दें
संसद बदल गयी है यहां की नख़ास में। 

जनता के पास एक ही चारा है बगावत
यह बात कह रहा हूँ मैं होशो-हवास में।
-अदम गौंडवी

अदम गौंडवी
गजल
पहले जनाब कोई शिगूफा उछाल दो।
फिर कर का बोझ कौम की गर्दन पे डाल दो।
रिश्वत को हक समझ जहां ले रहे हों लोग,
है और कोई मुल्क तो उसकी मिसाल दो।
औरत तुम्हारे पाँव की जूती की तरह है,
जब बोरियत महसूस हो घर से निकाल दो।
चीनी नहीं है घर में लो मेहमान आ गए,
महंगाई की भट्टी पे शराफत उबाल दो।