सोमवार, 5 अगस्त 2013

बीजेपी का भटकाव

बीजेपी खुद को “पार्टी विथ डिफरेंट” बताती है , पर लगता है अब वो ऐसा नहीं सोचती ,तभी तो वो कांग्रेस ,सपा , बामदलों,और लालू यादव के पार्टी के साथ खरी हो जाती है , कुछ दिन पहले राजनीतिक पार्टियों को RTI के दायरे में लाने की बात उठी थी ,सभी पार्टियों ने एक सुर में इसका बिरोध किया था ,जेल से चुनाव लड़ने पर रोक और दो साल से ज्यादा सजा होने पर सदन की सदस्यता स्वत: खत्म होने वाले फैसले के खिलाफ भी सभी पार्टियों के साथ भाजपा खरी है , संसद और विधायिका की सर्वोच्चता कायम रखने के मुद्दे पर भी बीजेपी बाकि पार्टियों के साथ भाई चारा निभाती दिख रही है ,,,,,,,,,,,,,संसद जनता के प्रति जबाबदेह है बीजेपी क्यों भूल रही है “लोकतंत्र में जनता सर्वोच है” | चाल, चरित्र और चेहरे की बाते करने वाली बीजेपी कभी कभी लगता है ये जूमला खुद के लिए नहीं मानती ,बीजेपी सुचिता की बात करती है, इन्ही सब ऊँचे नैतिक कारणों से “बीजेपी” लोग और मिडिया के निशाने पर ज्यादा रहती है ,राघव जी कांड के पहले सपा के नेता जी का भंडाफोड़ हुआ था जो महासय चूजो की डिमांड करते थे ,या फिर अन्य कोंग्रेसी नेतावो की करतुते........ लोग अन्य पार्टियों के दोस को जल्द भूल जाते है क्युकी वो भाजपा जैसी नैतिकता की बाते कम करती है | बीजेपी को समझना चाहिय उसके बेस वोटर संजीदा लोग है ,ये लोग अच्छे मोटिवेटर भी होते है , ,अन्य पार्टियों के कार्यकर्ताओं के तुलना में ये कम लोभी होते है | ये हल्की बाते पसंद नहीं करते अगर बीजेपी अपने नितियो और सिधान्तों पर गंभीर नहीं होगी तो ये उदासीन हो जायेंगे,,,        
             ऐसा नहीं है की बीजेपी को जनता के भावनात्मक मुदों की समझ नहीं है , पर वो इन मुद्दों से दूर दिखती है और उसके साथ में में खरा भी दूर रहकर ही होती है | जनता आज भी गैर राजनीतिक मंचो को तहरिज़ दे रही है क्युकी वो राजनीतिक पार्टियों से बहुत जयादा नाउम्मीद है | आन्ना जी, केजरीवाल ,या बाबा रामदेव का आन्दोलन उदाहरण है ,इन आन्दोलनों में उम्हरा जनसैलाब लोगो की मानसिकता को बयां करता है |

                                आज जो हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का उभार दिख रहा है वो ,मुस्लिम कट्टरतावाद,और मुस्लिम तुस्टीकरण के बिरोध का परिनाम है ,सिर्फ हिदुत्व के मुद्दे पर लोग बीजेपी को नहीं चुनेंगे ,लोग बीजेपी से सुशासन की उम्मीद करते है ,राजनेता नरेन्द्र मोदी में लोग अंतिम उम्मीद देख रहे है ,कांग्रेस से लोगो की खीज भी मोदी जी की ताकत है ,पर बार बार भाजपा और उसके कुछ नेता जमीनी हकीकत से भटक जा रहे है जो ठीक नहीं |