रविवार, 11 अगस्त 2013

कोई जोर नहीं चलता ,,,,,,,,,,

मैंने अपने दिल के दरवाज़े पर लिख छोरा था,
ये आम रास्ता नहीं है ,,,,,,,,,,,,
पर वह शोख इश्क आया , मुस्कान की कमंद फेकी ,
और बिना दस्तक दिए दाखिल हो गया ,,,,,,,,,
और फिर पुरे दमखम से चिल्लाया ,
है अपने दिल पर तुम्हारा बस !!!!!!!!!!!!!

                    “हरबर्ट शिपमैंन”