रविवार, 14 जुलाई 2013

आन्दोलन

अंग्रेजो का खुद का इतिहास बताता है ,की भारत में 1857 के पहले ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन हुआ करता था वो अंग्रेजी सरकार का सीधा शासन नहीं था | 1857 में एक क्रांति हुई जिसमे इस देश में मौजूद 99 % अंग्रेजों को भारत के लोगों ने चुन चुन के मार डाला था और 1% इसलिए बच गए क्योंकि उन्होंने अपने को बचाने के लिए अपने शरीर को काला रंग लिया था | लोग इतने गुस्से में थे कि उन्हें जहाँ अंग्रेजों के होने की भनक लगती थी तो वहां पहुँच के वो उन्हें काट डालते थे | हमारे देश के इतिहास की किताबों में उस क्रांति को सिपाही विद्रोह के नाम से पढाया जाता है |1857 की गर्मी में मेरठ से शुरू हुई ये क्रांति जिसे सैनिकों ने शुरू किया था, लेकिन एक आम आदमी का आन्दोलन बन गया और इसकी आग पुरे देश में फैली और 1 सितम्बर तक पूरा देश अंग्रेजों के चंगुल से आजाद हो गया था | भारत अंग्रेजों और अंग्रेजी अत्याचार से पूरी तरह मुक्त हो गया था | लेकिन नवम्बर 1857 में इस देश के कुछ गद्दार रजवाड़ों ने अंग्रेजों को वापस बुलाया और उन्हें इस देश में पुनर्स्थापित करने में हर तरह से योगदान दिया | धन बल, सैनिक बल, खुफिया जानकारी, जो भी सुविधा हो सकती थी उन्होंने दिया और उन्हें इस देश में पुनर्स्थापित किया | और आप इस देश का दुर्भाग्य देखिये कि वो रजवाड़े आज भी भारत की राजनीति में सक्रिय हैं अंग्रेज जब वापस आये तो उन्होंने क्रांति के उद्गम स्थल बिठुर (जो कानपुर के नजदीक है) पहुँच कर सभी 24000 लोगों का मार दिया चाहे वो नवजात हो या मरणासन्न | बिठुर के ही नाना जी पेशवा थे और इस क्रांति की सारी योजना यहीं बनी थी इसलिए अंग्रेजों ने ये बदला लिया था | उसके बाद उन्होंने अपनी सत्ता को भारत में पुनर्स्थापित किया और जैसे एक सरकार के लिए जरूरी होता है वैसे ही उन्होंने कानून बनाना शुरू किया | अंग्रेजों ने कानून तो 1840 से ही बनाना शुरू किया था और मोटे तौर पर उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को ध्वस्त कर दिया था, लेकिन 1857 से उन्होंने भारत के लिए ऐसे-ऐसे कानून बनाये जो एक सरकार के शासन करने के लिए जरूरी होता है | आप देखेंगे कि हमारे यहाँ जितने कानून हैं वो सब के सब 1857 से लेकर 1946 तक के हैं | 1840 से लेकर 1947 तक टैक्स लगाकर अंग्रेजों ने जो भारत को लुटा उसके सारे रिकार्ड बताते हैं कि करीब 300 लाख करोड़ रुपया लुटा अंग्रेजों ने इस देश से | हमारे देश में अंग्रेजों ने 34735 कानून बनाये शासन करने के लिए, लोगों का तर्क है कि अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है, दुनिया में 204 देश हैं और अंग्रेजी सिर्फ 11 देशों में बोली, पढ़ी और समझी जाती है, फिर ये कैसे अंतर्राष्ट्रीय भाषा है अंग्रेजों ने तो 23 प्रकार के टैक्स लगाये थे उस समय इस देश को लुटने के लिए, अब तो इस देश में VAT को मिला के 64 प्रकार के टैक्स हो गए हैं,अंग्रेजो ने फिर चतुराई से भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस की स्थापना करवाई , 72 प्रतिनिधियों की उपस्थिती के साथ 28 दिसंबर 1885 को बॉम्बे के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत महाविद्यालय में हुई थी। इसके प्रथम महासचिव(जनरल सेक्रेटरी) ऐ ओ ह्यूम थे.अपने शुरुवाती दिनों में कॉंग्रेस का दृष्टिकोण एक कुलीन वर्गीय संस्था का था। जिसका मुख्या उद्देश्य कोंग्रेस की सहायता करना था आज़ादी से पहले और इसने प्रांतीय विधायिकाओं में हिस्सा भी लिया.अंग्रेजो के फुट डालों राज़ करो के सिद्धांत को इसी ने पूरी तरह से अपनाया अपने जन्म से ही यह पार्टी हिंदु विरोधी पार्टी रही हैं. भगत सिंह को फांसी लगाने का विरोध नहीं किया आजाद जी को मरवा डाला .क्रांतिकारियों को आतंकवादी बताया करते थे.नेताजी को कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटने को मजबूर किया.अपने स्वार्थ के लिए देश का बंटवारा मंज़ूर किया.यदि बंटवारा हो ही गया था तो पूरी तरह से होने नहीं दिया।की बाद के झगरो का लाभ उठाते रहेगे देश के विभाजन की जिम्मेदार मुस्लिम लीग को सरकार में साझा किया. देश में आपातकाल लागू किया. स्वर्ण मंदिर पर हमला किया और उसे दूषितं किया. इंदिरा के मरने पर देश में 20000सिक्खों का दर्दनाक क़त्ल करवाया मतलब के लिए इसने हर किसी का इस्तमाल किया अब आप ही सोचिए ये पार्टी हम भारतीय लोगो का प्रतिनिधित्व करने के लिए है या हम पर शासन करने के लिए