सोमवार, 22 जुलाई 2013

अब्राहम लिंकन का पत्र

गुरु पूर्णिमा के अवसर,,,,,,
पर एक पत्र जो अब्राहम लिंकन ने अपने पुत्र के अध्यापक को लिखा था ,उसे आप सबो के बिच साझा कर रहा हु..
प्रिये अध्यापक महोदय
मेरा पुत्र आपके पास शीछा ग्रहण कर रहा है आपसे नम्र नवेदन है आप उसे चरित्रवान नागरिक बनाये | यह भी समझाएं सभी मनुष्य न्यायप्रिये या सच्चे नहीं होते ,आप यह भी समझाएं दुष्टो का प्रतिरोध करने के लिए बहादुर लोग भी होते है ,यदि स्वार्थी राजनीतिक होते है तो अच्छे लोग भी यहाँ है ,उसे यह बोध कराये यदि शत्रु होते है तो मित्र भी होते है, मै जनता हु की यह समय साध्य है किन्तु आप उसे समझाएं कमाया हुआ एक रूपया पाए गए पांच रुपये की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण है ,आप उसे खेल भावना में हारना सिखाएं और बिजयी होने का आनंद भी लेना सिखाये | उसे इर्ष्या से दूर ले जाये ,यदि हो सके तो मूक हास्य का रस भी सिखाये | उसमे यह समझ पैदा करे की प्रतारित करने वालो का मुकाबला करना सबसे आसान होता है ,उसे पुस्तकों को चमत्कार समझाए | आप उसे सांत चित होकर आकास में पंछियों, धुप में मधुमक्खीयो ,और हरे पर्वत पर रंग बिरंगे पुष्पों के सास्वत रहस्य पर मनन करने की भी शिछा दे |बिध्यालय में उसे समझाए धोखा देने की तुलना में असफल होना अधिक सम्मानजनक है ,उसे अपने बिचारो पर बिस्वास रखने की सिख दे ,चाहे दुसरे उसके बिचारो को गलत ही क्यों ना कहे |उसे सज्जनों से बिनम्र और उदंड व्यक्तियो के साथ कठोर वयवहार करना सिखाये ,मेरे पुत्र में ऐसी दृढ़ता विकसित करे की वह उस समूह का अनुसरण ना करे जिसमे सब लोग हा में हा मिलाने की होर कर रहे हो| उसे सबकी बाते सुनने की शिक्षा दे, परन्तु उसे यह भी शिखाये जो कुछ वह सुनता है उसे सत्य की कसोटी पर कसकर देखे और जो कुछ अच्छा लगे उसे ग्रहण करे | यदि हो सके तो उसे यह सिखाये दुःख के छनो में मुस्कुराया कैसे जाता है ,समझाए की आँखों में करुना ,प्रेम ,सम्बेदना के आंसू भरना लज्जा की बात नहीं | उसे ऐसे लोगो की उपेक्छा करना सिखाये जिन पर बिस्वास नहीं किया जा सकता है ,उसे अत्यधिक मधुर बोलने वालो किन्तु मन में कपट रखने वालो से सावधान रहना भी सिखाये | उसे यह शिक्षा दे की अपना मस्तिक्स तो सबसे ऊँचे दाम देने वाले के हवाले करे लेकिन आत्मा और बिस्वासो के दाम ना लगने दे ,उसे चिल्लाने वाली भीर की और से कान बंद रखना सिखाये.....
             आप उसके साथ सौम्य बव्हार तो करे किन्तु आवश्यकतानुसार कठोरता भी बरते क्युकी अग्निपरीक्षा से ही उत्तम फोलाद निर्मित होता है ,उसे मानव जाती पर परमबिस्वास रखने की शिक्षा दे ,,,,,
        मै आपसे बहुत अपेक्षाकर रहा हु आप बिचार करे की मेरे बेटे के लिए आप क्या – क्या कर सकते है |

                                           एक अभिभावक [अब्राहम लिंकन ]