रविवार, 7 जुलाई 2013

मैंने जो पहार देखा

हम मैदान के रहने वाले पहारो के बारे में बहुत नहीं जानते ,फिर भी हमारे दिमाग में यही आता है पहार होगा तो घना जंगल भी होगा ,जंगल में जानवर भी होगे ।आबादी नाम मात्र की होगी, आबादी जंगल पर आश्रित होगी ।पर हमने पहारो पर बिलकुल इसका उल्टा देखा लगभग सारे पहार पर आबादी थी , पहारो के जंगल काट कर खेत बन गए है खेती ऐसी की मैदान से कम नहीं ,जानवर के नाम पर हमें सिर्फ लंगूर दिखे ,सारे पहारपर घनी आबादी की बस्तिया मोसम भी गर्म ,एक तरह से देखा जाये तो मैदान और पहार में कोई फर्क नहीं रहा ।शायद यही बात प्रकीर्ति को पसंद नहीं आई हो ।उपर से ये बार बार साबित होता है की हमारे रहनुमा निकम्मे नकारे अदुर्दर्सि असम्बेदंसिल है ।जो अपने लालच के लिय हमारे भलाई के नाम पर पूंजीपतियो के साथ मिल कर प्रकीर्तिके साथ गन्दा खिलवार कर रहे है ,हमें भी समझना होगा जंगल पहार इंसानों के लिय नहीं है ,जो उसके हकदार है वो बिलुप्त क्यों हो रहे है ।अगर इस बात को हम नहीं समझे तो प्रकिरती हमें ऐसे ही सझायेगी लोग ऐसे ही मरेंगे हमारे नेता अंधे है ,हमारे जिंदगी की लिए इनके पास कोई योजना नहीं ......है