रविवार, 7 जुलाई 2013

हमारे धर्मगुरु


स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती का बयान पढ़ा ,पिकनिक बनी चारधाम यात्रा,पहले रिसिकेश और हरिद्वार से लोग पैदल यात्रा करते थे अब आस्था मजाक बन गयी है ।मेरा कहना है आने वाले चढ़ावे पर तो इन्हें कोई ऐतराज़ नहीं है ,इस परम बिपदा की घरी में जब राहत कार्य ठीक से नहीं हो रहे है तो एक धर्म गुरु होने के नाते सरकार से आप सभी शंकराचार्य क्यों नहीं बिरोध दर्ज करा रहे है ।आप को भी तो मंत्रियो जैसे सुभिधा मिले हुए है जहा आप जाते है सरकारी मेहमान होते है इसी लिए आप हमारे धर्म की दलाली करते है ,जब भी हिन्दू धर्म को जरूरत परति है आपलोग बिल में दुबक जाते है ,जरुरत मंदों के सहायता में आप लोग क्यों नहीं अबतक सामने आये इतनी चाडवा और मंदिरों में जमा अकूत सम्पति का क्या होगा ,माफ़ किजियगा अन्य धर्मो के तुलना में आप लोगो की धर्मिक ,सामाजिक,सेवा सम्बंधित, गतिबिधिया कुछ भी नहीं ,ऐसा नहीं की अच्छे लोगो की कमी है ,वे अपने छेत्र में महान कार्य कर रहे है ।पर हमरेव े धर्म के झंडाबदार बने ये शंकराचार्य हिन्दुओ और हिन्दू धर्म का कोई खास भला नहीं कर रहे है ,ये धार्मिक संस्थाओ और उसके सम्पतियो पर कब्ज़ा कर मठाधीस बन बैठे है ।ये खुद कई तरह के आडम्बर में लिप्त है ये अस्प्रिस्यता को बढावा देते है ,हिदू धर्म को दुरूह ,कठिन और इन्सान से दूर े रखने में इनका स्वार्थ है ।ये उपवास कर इतने मोटे हो गए है ,धार्मिक संसथाए लाभ के केंद्र में तब्दील हो गयी है कोई टैक्स देना नहीं है ।सच कहु तो ये इस महान सनातन धर्म का कोई भला नहीं कर रहे